पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से राजस्थान और पंजाब में बदलेगा मौसम, किसान भाइयों को पाले से बचने की सलाह
देश भर के मौसम में लगातार हो रहे बदलावों के बीच मौसम विशेषज्ञ देवेंद्र त्रिपाठी जी ने ताजा अनुमान जारी किया है। वर्तमान में बंगाल की खाड़ी से उठ रहे एक विशेष मौसमी सिस्टम के कारण दक्षिण और मध्य भारत के भागों में हलचल बढ़ गई है। इसके प्रभाव से महाराष्ट्र के पुणे, सांगली और कोल्हापुर जैसे इलाकों में बादलों की आवाजाही शुरू होने की संभावना है। वहीं, उत्तर भारत में एक नया पश्चिमी विक्षोभ (WD) सक्रिय होने जा रहा है, जिसका सीधा असर राजस्थान के सीमावर्ती जिलों बीकानेर और श्रीगंगानगर के साथ-साथ पंजाब के अमृतसर और फाजिल्का जैसे क्षेत्रों में बादलों के रूप में दिखाई देगा।
मैदानी राज्यों में इस समय कड़ाके की ठंड और भीषण शीतलहर का प्रकोप बना हुआ है। दोपहर के समय निकलने वाली धूप से भले ही हल्की राहत मिल रही हो, लेकिन पहाड़ों से आ रही बर्फीली हवाओं ने गलन काफी बढ़ा दी है। अनुमान के मुताबिक पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के साथ बिहार और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में मध्यम से घना कोहरा छाए रहने की संभावना है। कम दृश्यता (Visibility) के कारण सड़कों पर आवाजाही जोखिम भरी हो सकती है, इसलिए प्रशासन ने सावधानी बरतने की अपील की है।
विशेष रूप से किसान भाइयों के लिए आने वाले कुछ दिन काफी चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं। गिरते तापमान और ठंडी हवाओं के कारण फसलों पर पाले (Frost) का खतरा मंडरा रहा है। देवेंद्र त्रिपाठी जी के अनुसार 15 जनवरी को एक और नया सिस्टम दस्तक दे सकता है, जो मौसम के मिजाज को फिर से बदलने की क्षमता रखता है। इसके बाद 17 और 18 जनवरी के आसपास उत्तर भारत के पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी और बारिश की गतिविधियां और भी तेज होने के आसार हैं।
मौसम के इस बदलते मिजाज को देखते हुए किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपनी फसलों की सिंचाई और देखभाल पूरी तरह से पूर्वानुमानों को ध्यान में रखकर ही करें। पाले से बचाव के लिए आवश्यक इंतजाम करना इस समय बेहद जरूरी है। इसके साथ ही आम नागरिकों को भी सलाह दी गई है कि वे कड़ाके की इस ठंड में अपना और अपनों का ख्याल रखें और कोहरे के दौरान यात्रा करते समय विशेष सतर्कता बरतें।