मौसम विश्लेषक किरण वाघमोडे की चेतावनी; ला नीना के अंत और समुद्र के बढ़ते तापमान से बढ़ सकती है कृषि क्षेत्र की चिंता
भारतीय मानसून के भविष्य को लेकर मौसम गलियारों में एक बड़ी चर्चा शुरू हो गई है। मौसम विश्लेषक किरण वाघमोडे के ताजा आंकड़ों के अनुसार, साल 2026 के मानसून पर ‘अल नीनो’ (El Niño) का गंभीर प्रभाव देखने को मिल सकता है। सोशल मीडिया पर इसकी तुलना 1972 के ऐतिहासिक सूखे से की जा रही है। हालांकि, वाघमोडे का मानना है कि आज भारत सिंचाई और अन्न भंडार के मामले में 1972 की तुलना में कहीं अधिक मजबूत है, इसलिए वैसी भुखमरी जैसी स्थिति की संभावना कम है। फिर भी, वैज्ञानिक साक्ष्य डराने वाले हैं, क्योंकि जब भी अल नीनो सक्रिय होता है, तो 84% मामलों में मानसून कमजोर ही रहता है।
प्रशांत महासागर की वर्तमान स्थिति पर नजर डालें तो अच्छी बारिश लाने वाला ‘ला नीना’ (La Niña) अब अंतिम चरण में है। अनुमान है कि जनवरी के अंत तक ला नीना का प्रभाव पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। वैश्विक मौसम मॉडल संकेत दे रहे हैं कि मई और जून 2026 के दौरान प्रशांत महासागर के ‘नीनो 3.4’ क्षेत्र में पानी का तापमान तेजी से बढ़ेगा। मौसम विभाग के मॉडल्स के अनुसार जून से अगस्त के बीच अल नीनो विकसित होने की संभावना 50% से बढ़कर 61% तक पहुंच गई है, जो कमजोर मानसून का एक बड़ा संकेत है।











