अनुभवी किसान मदन लाल शर्मा ने साझा किए सफलता के मंत्र; अगेती बुवाई से कमाएं लाखों का मुनाफा
सब्जी की खेती में सही समय का चुनाव ही मुनाफे की असली कुंजी है। जयपुर के अनुभवी किसान मदन लाल शर्मा, जिन्हें खेती का 40 वर्षों का लंबा अनुभव है, बताते हैं कि यदि किसान भाई 30 जनवरी से पहले कुछ चुनिंदा सब्जियों की बुवाई कर देते हैं, तो उन्हें बाजार में ₹100 प्रति किलो तक का शानदार भाव मिल सकता है। उनके अनुसार, अक्सर किसान फसल उगाने में तो सफल हो जाते हैं, लेकिन समय का सही चुनाव न करने के कारण उन्हें उचित दाम नहीं मिल पाता। अगेती (Early) खेती के माध्यम से जब फसल बाजार में सबसे पहले पहुँचती है, तब प्रतिस्पर्धा कम और मांग अधिक होने के कारण किसानों की चांदी हो जाती है।
1. ग्वार फली (Cluster Beans): कम लागत में अधिक मुनाफा
30 जनवरी से पहले बोई जाने वाली पहली महत्वपूर्ण फसल ग्वार फली है। मदन लाल जी के अनुसार, इसे ‘कहने में गवार’ कहा जाता है, लेकिन यह पैसा देने में सबसे आगे है। इसकी बुवाई बेड विधि (Bed System) से करनी चाहिए, जिसमें कतार से कतार की दूरी टमाटर की तुलना में थोड़ी कम रखी जाती है। यह लगभग 60 से 70 दिनों में उत्पादन देना शुरू कर देती है। शुरुआत में ग्वार का मंडी भाव ₹100 किलो से नीचे नहीं जाता, जो किसानों के लिए बेहद लाभदायक साबित होता है।
2. ककड़ी (Cucumber): सलाद बाजार की पहली पसंद
दूसरे नंबर पर ककड़ी की खेती आती है। यह मात्र 40 से 45 दिनों में तैयार होने वाली फसल है। गर्मी की शुरुआत में सलाद के रूप में इसकी भारी मांग रहती है। इसे भी बेड विधि से लगाने की सलाह दी जाती है। ककड़ी की फसल कम समय की होती है (लगभग 2 महीने), जिससे किसान इसे जल्दी निपटाकर उसी खेत में दूसरी फसल भी लगा सकते हैं। शुरुआत में इसका भाव भी ₹80 से ₹100 प्रति किलो तक आसानी से मिल जाता है।
3. तोरई और लौकी (Sponge Gourd & Bottle Gourd): मचान नहीं, जमीन पर बेहतर उत्पादन
तोरई और लौकी ऐसी सब्जियां हैं जो लंबे समय तक उत्पादन देती हैं। मदन लाल जी का सुझाव है कि जनवरी की बुवाई के लिए मचान (Trellis) के बजाय नालियां बनाकर या बेड पर बेलों को जमीन पर ही फैलने देना चाहिए। इससे पौधों को ठंडा और गर्म दोनों वातावरण सही मात्रा में मिलता है और फल अधिक लगते हैं। लौकी तो एक ऐसी फसल है जो साल भर बाजार में छाई रहती है, और यदि इसकी अगेती फसल निकाली जाए तो एक बीघे में ₹2 लाख तक की कमाई संभव है।
4. भिंडी (Okra): सदाबहार और रोगमुक्त फसल
पांचवीं और सबसे महत्वपूर्ण सब्जी भिंडी है। भिंडी की अगेती बुवाई करने पर यह बरसात के मौसम तक चलती है, जिससे किसान को लंबे समय तक नियमित आमदनी होती रहती है। भिंडी में अन्य सब्जियों की तुलना में बीमारियां कम आती हैं और बाजार में इसकी पकड़ हमेशा मजबूत रहती है। यदि किसान भाई मल्चिंग पेपर (Mulching) का उपयोग करते हैं, तो खरपतवार कम होती है और उत्पादन की अवधि भी 15 दिन बढ़ जाती है, जिससे अतिरिक्त लाभ सुनिश्चित होता है।